क्या बनना चाहेंगे आप गाजर, अंडा या कॉफ़ी के बीज?

कुछ दिनों से उदास रह रही अपनी बेटी को देखकर माँ ने पूछा, ” क्या हुआ बेटा! मैं देख रही हूँ तुम बहुत उदास रहने लगी हो…सब ठीक तो है न?”

”कुछ भी ठीक नहीं है माँ… ऑफिस में बॉस की फटकार, दोस्तों की बेमतलब की नाराजगी…. पैसो की दिक्कत… मेरा मन बिल्कुल अशांत रहेने लगा है माँ! जी में तो आता है कि ये सब छोड़ कर कहीं चली जाऊं….” , बेटी ने रुआंसे होते हुए कहा।

माँ ये सब सुनकर गंभीर हो गयीं और बेटी का सिर सहलाते हुए किचन में ले गयीं।
वहां उन्होंने तीन पैन उठाये और उनमे पानी भर दिया। उसके बाद उन्होंने पहले पैन में गाजर, दूसरे में अंडे और तीसरे में कुछ कॉफ़ी के बीज डाल दिए।
फिर उन्होंने तीनो पैन्स को चूल्हे पे चढ़ा दिया और बिना कुछ बोले उनके खौलने का इंतज़ार करने लगीं।

लगभग बीस मिनट बाद उन्होंने गैस बंद कर दी, और फिर एक – एक कर के गाजर और अंडे अलग-अलग प्लेट में निकाल दिए और अंत में एक मग में कॉफ़ी उड़ेल दी।
माँ ने बेटी से पूछा , “बताओ तुमने क्या देखा?“

बेटी बोली, “गाजर, अंडे, कॉफ़ी… और क्या??… लेकिन ये सब करने का क्या मतलब है?”

माँ बोलीं ,” मेरे करीब आओ… और इन गाजर को छू कर देखो!”

बेटी ने छू कर देखा, गाजर नर्म हो चुके थे।

“अब अंडो को देखो।”

बेटी ने एक अंडा हाथ में लिया और देखने लगी… एग बाहर से तो पहले जैसा ही था पर अन्दर से सख्त हो चुका-था।

और अंत में माँ ने कॉफ़ी वाला मग उठा कर देखने को कहा….

बेटी ने कुछ झुंझलाते हुए पूछा, ”…इसमे क्या देखना है…ये तो कॉफ़ी बन चुका है…लेकिन ये सब करने का मतलब क्या है ….???”

माँ बोलीं, ” इन तीनो चीजों को एक ही तकलीफ से होकर गुजरना पड़ा — खौलता पानी। लेकिन हर एक ने अलग अलग तरीके से रियेक्ट किया।

गाजर पहले तो ठोस था पर खौलते पानी रुपी मुसीबत आने पर कमजोर और नरम पड़ गया, वहीँ अंडा पहले ऊपर से सख्त और अन्दर से नर्म था वह मुसीबत आने के बाद उसे झेल तो गया पर वह अन्दर से बदल गया, कठोर हो गया, सख्त दिल बन गया …. लेकिन कॉफ़ी के बीज तो बिल्कुल अलग थीं… उनके सामने जो दिक्कत आयी उसका सामना किया और मूल रूप खोये बिना खौलते पानी रुपी मुसीबत को कॉफ़ी की सुगंध में बदल दिया…।“

अब माँ ने बेटी से पूछा, ” तुम इनमे से कौन हो ? जब तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई दिक्कत आती है तो तुम किस तरह व्यवहार करती हो? सोचो कि तुम इनमे से क्या हो…गाजर, अंडा या कॉफ़ी के बीज?”

बेटी माँ की बात समझ चुकी थी, और उसने माँ से वादा किया कि वो अब उदास नहीं होगी और विपरीत परिस्थितियों का सामना अच्छे से करेगी।

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