साथ-साथ जो खेले थे बचपन में, वो सब दोस्त अब थकने लगे हैं..

साथ-साथ जो खेले थे बचपन में,
वो सब दोस्त अब थकने लगे हैं..

किसी का पेट निकल आया है,
किसी के बाल पकने लगे हैं..

सब पर भारी ज़िम्मेदारी है,
सबको छोटी-मोटी कोई बीमारी है..

दिन भर जो भागते-दौड़ते थे,
वो अब चलते-चलते भी रुकने लगे हैं..

उफ़ क्या क़यामत है,
सब दोस्त थकने लगे हैं..

किसी को लोन की फ़िक्र है,
कहीं हेल्थ टेस्ट का ज़िक्र है..

फ़ुर्सत की सब को कमी है,
आँखों में अजीब सी नमी है..

कल जो प्यार के ख़त लिखते थे,
आज बीमे के फ़ॉर्म भरने में लगे है..

उफ़ क्या क़यामत है,
सब दोस्त थकने लगे हैं..

देख कर पुरानी तस्वीरें,
आज जी भर आता है..

क्या अजीब शय है ये वक़्त भी,
किस तरह ये गुज़र जाता है..

कल का जवान दोस्त मेरा,
आज अधेड़ नज़र आता है..

कल के ख़्वाब सजाते थे जो कभी,
आज गुज़रे दिनों में खोने लगे हैं..

उफ़ क्या क़यामत है,
सब दोस्त अब थकने लगे हैं..!!
✨✨✨✨✨✨✨✨✨

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